📰 EESL/CESL के EV प्रोजेक्ट में ड्राइवर भर्ती पर गंभीर आरोप, रिश्वतखोरी और अनियमितताओं की जांच की मांग तेज
विद्युत मंत्रालय (MoP) के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां Energy Efficiency Services Limited (EESL) और Convergence Energy Services Limited (CESL) एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही हैं। इस बार मामला इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) प्रोजेक्ट के तहत ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित रूप से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश के विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों में तैनात इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन हेतु ड्राइवरों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
कुछ प्रभावित ड्राइवरों ने, अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर, बताया कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक नौकरी से हटा दिया गया। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे ड्राइवरों को भी अचानक अलग-अलग बहानों के आधार पर बाहर कर दिया जाता है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि जिन नए ड्राइवरों की भर्ती की जाती है, उनसे कथित रूप से भारी रकम वसूली जाती है। आरोप है कि यह रकम लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। इस पूरे कथित रैकेट को एक प्रमुख सुपरवाइजर के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जो ड्राइवरों की नियुक्ति और निष्कासन में अहम भूमिका निभाता है।
ड्राइवरों का यह भी आरोप है कि संबंधित सुपरवाइजर को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले को लेकर कई प्रभावित ड्राइवरों ने मीडिया से संपर्क किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, तो भर्ती प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी परियोजनाओं में इस तरह के आरोप न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि इससे आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर होता है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण को लेकर अभी तक EESL/CESL की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि संबंधित मंत्रालय एवं जांच एजेंसियां इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
